Friday, September 28, 2018

1 किलो जामुन- A True Story



1 किलो जामुन- A True Story


दिल को छू जाने वाली कहानी......
ऑफिस से निकल कर शर्मा जी ने
स्कूटर स्टार्ट किया ही था कि उन्हें याद आया, 

पत्नी ने कहा था 1 किलो जामुन लेते आना। 

तभी उन्हें सड़क किनारे बड़े और ताज़ा जामुन बेचते हुए
एक बीमार सी दिखने वाली बुढ़िया दिख गयी।

वैसे तो वह फल हमेशा "राम आसरे फ्रूट भण्डार" से
ही लेते थे,
पर आज उन्हें लगा कि क्यों न बुढ़िया से ही खरीद लूँ ?

उन्होंने बुढ़िया से पूछा, "माई, जामुन कैसे दिए"

बुढ़िया बोली, बाबूजी 40 रूपये किलो,
शर्माजी बोले, माई 30 रूपये दूंगा।

बुढ़िया ने कहा, 35 रूपये दे देना,
दो पैसे मै भी कमा लूंगी।

शर्मा जी बोले, 30 रूपये लेने हैं तो बोल,
बुझे चेहरे से बुढ़िया ने,"न" मे गर्दन हिला दी।
.
शर्माजी बिना कुछ कहे चल पड़े
और राम आसरे फ्रूट भण्डार पर आकर
जामुन का भाव पूछा तो वह बोला 50 रूपये किलो हैं

बाबूजी, कितने दूँ ?
शर्माजी बोले, 5 साल से फल तुमसे ही ले रहा हूँ,
ठीक भाव लगाओ।

तो उसने सामने लगे बोर्ड की ओर इशारा कर दिया।
बोर्ड पर लिखा था- "मोल भाव करने वाले माफ़ करें"
शर्माजी को उसका यह व्यवहार बहुत बुरा लगा,
उन्होंने कुछ सोचकर स्कूटर को वापस
ऑफिस की ओर मोड़ दिया।
.
सोचते सोचते वह बुढ़िया के पास पहुँच गए।
बुढ़िया ने उन्हें पहचान लिया और बोली,

"बाबूजी जामुन दे दूँ, पर भाव 35 रूपये से कम नही लगाउंगी।
शर्माजी ने मुस्कराकर कहा,
माई एक नही दो किलो दे दो और भाव की चिंता मत करो।

बुढ़िया का चेहरा ख़ुशी से दमकने लगा।
जामुन देते हुए बोली। बाबूजी मेरे पास थैली नही है ।
फिर बोली, एक टाइम था जब मेरा आदमी जिन्दा था

तो मेरी भी छोटी सी दुकान थी।
सब्ज़ी, फल सब बिकता था उस पर।
आदमी की बीमारी मे दुकान चली गयी,
आदमी भी नही रहा। अब खाने के भी लाले पड़े हैं।
किसी तरह पेट पाल रही हूँ। कोई औलाद भी नही है

जिसकी ओर मदद के लिए देखूं।
इतना कहते कहते बुढ़िया रुआंसी हो गयी,
और उसकी आंखों मे आंसू आ गए ।

शर्माजी ने 100 रूपये का नोट बुढ़िया को दिया तो
वो बोली "बाबूजी मेरे पास छुट्टे नही हैं।

शर्माजी बोले "माई चिंता मत करो, रख लो,
अब मै तुमसे ही फल खरीदूंगा,
और कल मै तुम्हें 1000 रूपये दूंगा।
धीरे धीरे चुका देना और परसों से बेचने के लिए
मंडी से दूसरे फल भी ले आना।

बुढ़िया कुछ कह पाती उसके पहले ही
शर्माजी घर की ओर रवाना हो गए।
घर पहुंचकर उन्होंने पत्नी से कहा,
न जाने क्यों हम हमेशा मुश्किल से
पेट पालने वाले, थड़ी लगा कर सामान बेचने वालों से
मोल भाव करते हैं किन्तु बड़ी दुकानों पर
मुंह मांगे पैसे दे आते हैं।

शायद हमारी मानसिकता ही बिगड़ गयी है।
गुणवत्ता के स्थान पर हम चकाचौंध पर
अधिक ध्यान देने लगे हैं।

अगले दिन शर्माजी ने बुढ़िया को 500 रूपये देते हुए कहा,
"माई लौटाने की चिंता मत करना।
जो फल खरीदूंगा, उनकी कीमत से ही चुक जाएंगे।
जब शर्माजी ने ऑफिस मे ये किस्सा बताया तो
सबने बुढ़िया से ही फल खरीदना प्रारम्भ कर दिया।
तीन महीने बाद ऑफिस के लोगों ने स्टाफ क्लब की ओर से
बुढ़िया को एक हाथ ठेला भेंट कर दिया।
बुढ़िया अब बहुत खुश है।
उचित खान पान के कारण उसका स्वास्थ्य भी
पहले से बहुत अच्छा है ।
हर दिन शर्माजी और ऑफिस के
दूसरे लोगों को दुआ देती नही थकती।

शर्माजी के मन में भी अपनी बदली सोच और
एक असहाय निर्बल महिला की सहायता करने की संतुष्टि का भाव रहता है..!


"जीवन मे किसी बेसहारा की मदद करके देखो यारों,अपनी पूरी जिंदगी मे किये गए सभी कार्यों सेज्यादा संतोष मिलेगा...

Monday, September 24, 2018

Rules of Nature Quotes in Hindi | प्रकृति पर सर्वश्रेष्ठ अनमोल विचार

 

 प्रकृति पर सर्वश्रेष्ठ अनमोल विचार

Rules of Nature Quotes in Hindi

 

प्रकृति  का पहला  नियम :-
यदि खेत में  बीज न डालें जाएं  तो कुदरत  उसे घास-फूस  से  भर देती हैं ।
ठीक  उसी  तरह से  दिमाग  में सकारात्मक  विचार  न भरे  जाएँ  तो नकारात्मक  विचार  अपनी  जगह  बना ही लेती है ।

 

प्रकृति  का दूसरा  नियम :-
जिसके  पास  जो होता है  वह वही बांटता  है।
सुखी "सुख  "बांटता है
दुःखी  "दुःख " बांटता  है
ज्ञानी "ज्ञान" बांटता है
भ्रमित  "भ्रम "बांटता है
भयभीत"  भय "बांटता हैं 

प्रकृति  का तिसरा नियम :-
आपको  जीवन से जो कुछ भी मिलें  उसे पचाना सीखो क्योंकि
भोजन  न पचने  पर रोग बढते है।
पैसा न पचने  पर दिखावा बढता है
बात  न पचने पर चुगली  बढती है ।
प्रशंसा  न पचने पर  अंहकार  बढता है।
निंदा  न पचने पर  दुश्मनी  बढती है ।
राज न पचने पर  खतरा  बढता है ।
दुःख  न पचने पर  निराशा बढती है ।
और सुख न पचने पर  पाप बढता है ।
बात  कडुवी बहुत  है  पर सत्य  है



Kahaani Ghar Ghar Kii

 

कहानी घर घर की

Kahaani Ghar Ghar Kii


एक जज अपनी पत्नी को क्यों दे रहे हैं तलाक???।
""रोंगटे खड़े"" कर देने वाली स्टोरी को जरूर पढ़े
⚡कल रात एक ऐसा वाकया हुआ जिसने मेरी ज़िन्दगी के कई पहलुओं को छू लिया.
करीब 7 बजे होंगे,
शाम को मोबाइल बजा ।
उठाया तो उधर से रोने की आवाज...
मैंने शांत कराया और पूछा कि भाभीजी आखिर हुआ क्या?
उधर से आवाज़ आई..
आप कहाँ हैं??? और कितनी देर में आ सकते हैं?
मैंने कहा:- "आप परेशानी बताइये"।
और "भाई साहब कहाँ हैं...?माताजी किधर हैं..?" "आखिर हुआ क्या...?"
लेकिन
उधर से केवल एक रट कि "आप आ जाइए", मैंने आश्वाशन दिया कि कम से कम एक घंटा पहुंचने में लगेगा. जैसे तैसे पूरी घबड़ाहट में पहुँचा;
देखा तो भाई साहब [हमारे मित्र जो जज हैं] सामने बैठे हुए हैं;
भाभीजी रोना चीखना कर रही हैं 12 साल का बेटा भी परेशान है; 9 साल की बेटी भी कुछ नहीं कह पा रही है।
मैंने भाई साहब से पूछा कि ""आखिर क्या बात है""???
""भाई साहब कोई जवाब नहीं दे रहे थे "".
फिर भाभी जी ने कहा ये देखिये तलाक के पेपर, ये कोर्ट से तैयार करा के लाये हैं, मुझे तलाक देना चाहते हैं,
मैंने पूछा - ये कैसे हो सकता है???. इतनी अच्छी फैमिली है. 2 बच्चे हैं. सब कुछ सेटल्ड है. ""प्रथम दृष्टि में मुझे लगा ये मजाक है"".
लेकिन मैंने बच्चों से पूछा दादी किधर है,
बच्चों ने बताया पापा ने उन्हें 3 दिन पहले नोएडा के वृद्धाश्रम में शिफ्ट कर दिया है.
मैंने घर के नौकर से कहा।
मुझे और भाई साहब को चाय पिलाओ;
कुछ देर में चाय आई. भाई साहब को बहुत कोशिशें कीं चाय पिलाने की.
लेकिन उन्होंने नहीं पी और कुछ ही देर में वो एक "मासूम बच्चे की तरह फूटफूट कर रोने लगे "बोले मैंने 3 दिन से कुछ भी नहीं खाया है. मैं अपनी 61 साल की माँ को कुछ लोगों के हवाले करके आया हूँ.
पिछले साल से मेरे घर में उनके लिए इतनी मुसीबतें हो गईं कि पत्नी (भाभीजी) ने कसम खा ली. कि ""मैं माँ जी का ध्यान नहीं रख सकती""ना तो ये उनसे बात करती थी
और ना ही मेरे बच्चे बात करते थे. रोज़ मेरे कोर्ट से आने के बाद माँ खूब रोती थी. नौकर तक भी अपनी मनमानी से व्यवहार करते थे
माँ ने 10 दिन पहले बोल दिया.. बेटा तू मुझे ओल्ड ऐज होम में शिफ्ट कर दे.
मैंने बहुत कोशिशें कीं पूरी फैमिली को समझाने की, लेकिन किसी ने माँ से सीधे मुँह बात नहीं की.
जब मैं 2 साल का था तब पापा की मृत्यु हो गई थी दूसरों के घरों में काम करके *""मुझे पढ़ाया. मुझे इस काबिल बनाया कि आज मैं जज हूँ"". लोग बताते हैं माँ कभी दूसरों के घरों में काम करते वक़्त भी मुझे अकेला नहीं छोड़ती थीं.
उस माँ को मैं ओल्ड ऐज होम में शिफ्ट करके आया हूँ. पिछले 3 दिनों से
मैं अपनी माँ के एक-एक दुःख को याद करके तड़प रहा हूँ,जो उसने केवल मेरे लिए उठाये।
मुझे आज भी याद है जब..
""मैं 10th की परीक्षा में अपीयर होने वाला था. माँ मेरे साथ रात रात भर बैठी रहती"".
एक बार माँ को बहुत फीवर हुआ मैं तभी स्कूल से आया था. उसका शरीर गर्म था, तप रहा था. मैंने कहा माँ तुझे फीवर है हँसते हुए बोली अभी खाना बना रही थी इसलिए गर्म है.
लोगों से उधार माँग कर मुझे दिल्ली विश्वविद्यालय से एलएलबी तक पढ़ाया. मुझे ट्यूशन तक नहीं पढ़ाने देती थींकि कहीं मेरा टाइम ख़राब ना हो जाए.
कहते-कहते रोने लगे..और बोले--""जब ऐसी माँ के हम नहीं हो सके तो हम अपने बीबी और बच्चों के क्या होंगे"".
हम जिनके शरीर के टुकड़े हैं,आज हम उनको ऐसे लोगों के हवाले कर आये, ""जो उनकी आदत, उनकी बीमारी, उनके बारे में कुछ भी नहीं जानते"",
जब मैं ऐसी माँ के लिए कुछ नहीं कर सकता तो "मैं किसी और के लिए भला क्या कर सकता हूँ".
आज़ादी अगर इतनी प्यारी है और माँ इतनी बोझ लग रही हैं, तो मैं पूरी आज़ादी देना चाहता हूँ
.
जब मैं बिना बाप के पल गया तो ये बच्चे भी पल जाएंगे. इसीलिए मैं तलाक देना चाहता हूँ।

सारी प्रॉपर्टी इन लोगों के हवाले करके उस ओल्ड ऐज होम में रहूँगा. कम से कम मैं माँ के साथ रह तो सकता हूँ।
और अगर इतना सब कुछ कर के ""माँ आश्रम में रहने के लिए मजबूर है"", तो एक दिन मुझे भी आखिर जाना ही पड़ेगा.
माँ के साथ रहते-रहते आदत भी हो जायेगी. माँ की तरह तकलीफ तो नहीं होगी.
जितना बोलते उससे भी ज्यादा रो रहे थे.
बातें करते करते रात के 12:30 हो गए।
मैंने भाभीजी के चेहरे को देखा.
उनके भाव भी प्रायश्चित्त और ग्लानि से भरे हुए थे; मैंने ड्राईवर से कहा अभी हम लोग नोएडा जाएंगे।
भाभीजी और बच्चे हम सारे लोग नोएडा पहुँचे.
बहुत ज़्यादा रिक्वेस्ट करने पर गेट खुला. भाई साहब ने उस गेटकीपर के पैर पकड़ लिए, बोले मेरी माँ है, मैं उसको लेने आया हूँ,
चौकीदार ने कहा क्या करते हो साहब,
भाई साहब ने कहा मैं जज हूँ,
उस चौकीदार ने कहा:-

*""जहाँ सारे सबूत सामने हैं तब तो आप अपनी माँ के साथ न्याय नहीं कर पाये,
औरों के साथ क्या न्याय करते होंगे साहब"*।

इतना कहकर हम लोगों को वहीं रोककर वह अन्दर चला गया.
अन्दर से एक महिला आई जो वार्डन थी.
उसने बड़े कातर शब्दों में कहा:-
"2 बजे रात को आप लोग ले जाके कहीं मार दें, तो

मैं अपने ईश्वर को क्या जबाब दूंगी..?"

मैंने सिस्टर से कहा आप विश्वास करिये. ये लोग बहुत बड़े पश्चाताप में जी रहे हैं.
अंत में किसी तरह उनके कमरे में ले गईं. कमरे में जो दृश्य था, उसको कहने की स्थिति में मैं नहीं हूँ.

केवल एक फ़ोटो जिसमें पूरी फैमिली है और वो भी माँ जी के बगल में, जैसे किसी बच्चे को सुला रखा है.
मुझे देखीं तो उनको लगा कि बात न खुल जाए
लेकिन जब मैंने कहा हम लोग आप को लेने आये हैं, तो पूरी फैमिली एक दूसरे को पकड़ कर रोने लगी

आसपास के कमरों में और भी बुजुर्ग थे सब लोग जाग कर बाहर तक ही आ गए.
उनकी भी आँखें नम थीं
कुछ समय के बाद चलने की तैयारी हुई. पूरे आश्रम के लोग बाहर तक आये. किसी तरह हम लोग आश्रम के लोगों को छोड़ पाये.
सब लोग इस आशा से देख रहे थे कि शायद उनको भी कोई लेने आए, रास्ते भर बच्चे और भाभी जी तो शान्त रहे.......

लेकिन भाई साहब और माताजी एक दूसरे की भावनाओं को अपने पुराने रिश्ते पर बिठा रहे थे.घर आते-आते करीब 3:45 हो गया.

👩 💐 भाभीजी भी अपनी ख़ुशी की चाबी कहाँ है; ये समझ गई थी 💐

मैं भी चल दिया. लेकिन रास्ते भर वो सारी बातें और दृश्य घूमते रहे.

👵 💐""माँ केवल माँ है"" 💐👵

उसको मरने से पहले ना मारें.

माँ हमारी ताकत है उसे बेसहारा न होने दें , अगर वह कमज़ोर हो गई तो हमारी संस्कृति की ""रीढ़ कमज़ोर"" हो जाएगी , बिना रीढ़ का समाज कैसा होता है किसी से छुपा नहीं

अगर आपकी परिचित परिवार में ऐसी कोई समस्या हो तो उसको ये जरूर पढ़ायें, बात को प्रभावी ढंग से समझायें , कुछ भी करें लेकिन हमारी जननी को बेसहारा बेघर न होने दें, अगर माँ की आँख से आँसू गिर गए तो *"ये क़र्ज़ कई जन्मों तक रहेगा", यकीन मानना सब होगा तुम्हारे पास पर ""सुकून नहीं होगा"" , सुकून सिर्फ माँ के आँचल में होता है उस आँचल को बिखरने मत देना।
✍👏👏💐💐👏👏
इस मार्मिक दास्तान को खुद भी पढ़िये और अपने बच्चों को भी पढ़ाइये ताकि पश्चाताप न करना पड़े।
धन्यवाद!!!

Saturday, September 22, 2018

Shadi Ki Pehli Raat Divorce-शादी की पहली रात डाइवोर्स




शादी की पहली रात डाइवोर्स
Shadi Ki Pehli Raat Divorce

       शादी की सुहागसेज पर बैठी एक स्त्री का पति जब भोजन का थाल लेकर अंदर आया तो पूरा कमरा उस स्वादिष्ट
भोजन की खुशबू से भर गया। रोमांचित उस स्त्री ने अपने पति से निवेदन किया कि मांजी को भी यहीं बुला लेते
तो हम तीनों साथ बैठकर भोजन करते। पति ने कहा छोड़ो उन्हें वो खाकर सो गई होंगी आओ हम साथ में भोजन करते
है प्यार से, उस स्त्री ने पुनः अपने पति से कहा कि नहीं मैंने उन्हें खाते हुए नहीं देखा है, तो पति ने जवाब दिया कि क्यों तुम जिद कर रही हो
शादी के कार्यों से थक गयी होंगी इसलिए सो गई होंगी, नींद टूटेगी तो खुद भोजन कर लेंगी। तुम आओ हम प्यार से खाना खाते हैं।
उस स्त्री ने तुरंत devoice  लेने का फैसला कर लिया और Divorce  लेकर उसने दूसरी शादी कर ली और इधर उसके पहले पति ने
भी दूसरी शादी कर ली। दोनों अलग- अलग सुखी घर रहने लगे।

इधर उस स्त्री के दो बच्चे हुए जो बहुत ही सुशील और आज्ञाकारी थे। जब वह स्त्री ६० वर्ष की हुई तो वह बेटों को बोली में चारो धाम की यात्रा करना
चाहती हूँ ताकि तुम्हारे सुखमय जीवन के लिए प्रार्थना कर सकूँ। बेटे तुरंत अपनी माँ को लेकर चारों धाम की यात्रा पर निकल गये। एक जगह तीनों माँ बेटे
भोजन के लिए रुके और बेटे भोजन परोस कर मां से खाने की विनती करने लगे। उसी समय उस स्त्री की नजर सामने एक फटेहाल, भूखे और गंदे से एक वृद्ध पुरुष
पर पड़ी जो इस स्त्री के भोजन और बेटों की तरफ बहुत ही कातर नजर से देख रहा था। उस स्त्री को उस पर दया गईं और बेटों को बोली जाओ पहले उस वृद्ध
को नहलाओ और उसे वस्त्र दो फिर हम सब मिलकर भोजन करेंगे। बेटे जब उस वृद्ध को नहलाकर कपड़े पहनाकर उसे उस स्त्री के सामने लाये तो वह स्त्री
आश्चर्यचकित रह गयी वह वृद्ध वही था जिससे उसने शादी की सुहागरात को ही Divorce ले लिया था। उसने उससे पूछा कि क्या हो गया जो तुम्हारी हालत इतनी
दयनीय हो गई तो उस वृद्ध ने नजर झुका के कहा कि सब कुछ होते ही मेरे बच्चे मुझे भोजन नहीं देते थे, मेरा तिरस्कार करते थे, मुझे घर से बाहर निकाल दिया।
उस स्त्री ने उस वृद्ध से कहा कि इस बात का अंदाजा तो मुझे तुम्हारे साथ सुहागरात को ही लग गया था जब तुमने पहले अपनी बूढ़ी माँ को भोजन
कराने के बजाय उस स्वादिष्ट भोजन की थाल लेकर मेरे कमरे में गए और मेरे बार-बार कहने के बावजूद भी आप ने अपनी माँ का तिरस्कार किया। उसी का फल
आज आप भोग रहे हैं।

            जैसा व्यहवार हम अपने बुजुर्गों के साथ करेंगे उसी देखा-देख कर हमारे बच्चों में भी यह गुण आता है कि शायद यही परंपरा होती है।
सदैव माँ बाप की सेवा ही हमारा दायित्व बनता है। जिस घर में माँ बाप हँसते है, वहीं प्रभु बसते है।

Post by Amit Barnwal
#respect_all_ladies


Friday, September 21, 2018

HOW TO BECOME RICH-आमिर बनने के लिए



आमिर बनने के लिए How To Become Rich


                                       वैसे तो आमिर बनना हर किसी का सपना होता हैं। हर कोई चाहता हैं की हमारा पूरा जीवन आरामसे जाये लेकिन अगर हमें आमिर बनना हैं तो पहले मेहनत करनी पड़ेंगी। तभी उस मेहनत का फल मीठा मिलेंगा।

हमें यह याद रखना चाहिए की आमिर बनने के लिए जिस रास्ते पर चलना पड़ता है, वह फूलो से भरा नही होंगा। बल्कि यह आपकी लगन, जीद और आपकी मेहनत का फल होंगा। इसीलिए जीवन में समृद्ध बनने के लिए हमें ख़ुद को उस रास्ते पर ले जाना होंगा जो हमें आर्थिक रूप से मजबूत बनाए।

इसीलिए यदि आप अमीर बनना चाहते हो, तो आपको केवल दो चीजो की ही जरुरत होंगी – दृढ़ संकल्प और इच्छाशक्ति।

1. खुद में निवेश करे –
अमीर बनने के लिए यदि कोई कुछ कर सकता है तो वो हम हैं। सबसे पहले तो हमें खुद में निवेश करना चाहिए। यानि अपनी योग्यताओ और कौशल को विकसित करने पर हमें सबसे पहले निवेश करना चाहिए।
हमें अपने क्षेत्र के उन लोगो से मिलते रहना चाहिए, जो हमारे लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायता कर सकते है। आप जितना अपने क्षेत्र के बारेमें जितना ज्यादा ज्ञान रखोंगे , उतनी ही ज्यादा संभावनाए आपके अमीर होने की बढ़ जाएँगी।

2. व्यवसाय की शुरुवात करे –
यदि आपको कोई काम करना पसंद है, तो उसे अपना व्यवसाय बनाएं और उसके प्रति कड़ी महेनत कीजिये और उसे धीरे-धीरे बढायें, लेकिन आप जो कर रहे हो उसमे आपकी रूचि होना बहुत जरुरी है।

उस काम के प्रति आपकी जीद और लगन ही आपको आमिर बना सकती हैं।

3. बजट बनाकर –
हम में से बहुत से लोगो का जन्म मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ है। हमें बचपन से यह सिखाया है की पैसे आसानी से नही कमाए जाते और इसीलिए खर्चो पर नियंत्रण पाने के लिए हम बजट बनाते है।

इसी की सहायता से हम कम खर्च कर ज्यादातर पैसो को निवेश करने लगते है। मध्यम परिवार में हर माह खर्चे की सीमा तय की जाती है और उस आधार पर ही खर्चा किया जाता है। हमें हमेशा बेतुकी चीजो पर खर्च करने से बचना चाहिए।

पृथ्वी पर रहने वाले हर इंसान के लिए धन बहुत जरुरी है। लेकिन हमेशा ध्यान रखे की सफलता का कोई शॉर्टकट नही होता। पूर्वानुमान लगाने के लिए किस्मत, दृढ़ संकल्प और क्षमता का होना बहुत जरुरी है।
अवसर हमेशा आपके रास्ते में आयेंगे लेकिन यदि आप उन्हें अपनाओगे नही, तो कोई आपकी सहायता नही कर सकता। इसीलिए सबसे पहले खुद में निवेश कर अच्छे मार्ग पर चलने की ही कोशिश करे।

Good Morning Whatsapp Image Status in Hindi

Good Morning Whatsapp Image Status in Hindi
एक चीज़ जो रोज घट रही है, वो है आयु।
एक चीज़ जो रोज बढ़ रही है, वो है तृष्णा।
एक चीज़ जो सदा एक सी रहती है,
वो है “विधि का विधान।”
एक सुखद जीवन के लिए,
मस्तिष्क में सत्यता,
होठों पर प्रसन्नता और
हृदय में पवित्रता जरूरी है।
जिसका मन मस्त है..
उसके पास समस्त है..!!
जन्म के रिश्ते
ईश्वर का प्रसाद जैसे हैं
लेकिन
खुद के बनाये रिश्ते
आपकी पूँजी हैं
सहेज कर रखिये
परिवार 🕒 घड़ी की सूइयो जैसा होना चाहिये…
कोई छोटा हो, कोई बड़ा हो,
कोई स्लो हो, कोई फास्ट हो,
पर जब किसी के 12 बजाने हो तो सब साथ हो……!!
🌹सुप्रभात🌹
Parivar Ghadi Ki Suiyo Jaisa Hona Chaiye,
Koi Chhota Ho, Koi Bada Ho,
Koi Slow Ho, Koi Fast Ho,
Par Jab Kisi Ke 12 Bajane Ho To Sab Sath Ho….
Good Morning !! 

Saturday, September 8, 2018

स्वामी विवेकानंद के अनमोल वचन


स्वामी विवेकानंद के अनमोल वचन




•    सर्वसाधारण जनता की उपेक्षा एक बड़ा राष्ट्रीय अपराध है। - स्वामी विवेकानंद 
•    भय से ही दुःख आते हैं, भय से ही मृत्यु होती है और भय से ही बुराइयाँ उत्पन्न होती हैं। - स्वामी विवेकानंद
•    पहले हर अच्छी बात का मज़ाक बनता है, फिर उसका विरोध होता है और फिर उसे स्वीकार कर लिया जाता है। - स्वामी विवेकानंद

•    आत्मविश्वास सरीखा दूसरा कोई मित्र नहीं। यही हमारी उन्नति में सबसे बड़ा सहयक होता है। - स्वामी विवेकानंद

•    कामनाएँ समुद्र की भाँति अतृप्त हैं। पूर्ति का प्रयास करने पर उनका कोलाहल और बढ़ता है। - स्वामी विवेकानंद


•    जब तक तुम स्वयं अपने में विश्वास नहीं करते, परमात्मा में तुम विश्वास नहीं कर सकते। - स्वामी विवेकानंद


•    जीवन का रहस्य भोग में स्थित नहीं है, यह केवल अनुभव द्वारा निरंतर सीखने से ही प्राप्त होता है। - स्वामी विवेकानंद

•    जो दूसरों से घृणा करता है वह स्वयं पतित होता है। – स्वामी विवेकानन्द

•    ‘हिंसा’ को आप सर्वाधिक शक्ति संपन्न मानते हैं तो मानें पर एक बात निश्चित है कि हिंसा का आश्रय लेने पर बलवान व्यक्ति भी सदा ‘भय’ से प्रताड़ित रहता है। दूसरी ओर हमें तीन वस्तुओं की आवश्यकता हैः अनुभव करने              के लिए हृदय की, कल्पना करने के लिए मस्तिष्क की और काम करने के लिए हाथ की। - स्वामी विवेकानंद


•    मनुष्य की महानता उसके कपडों से नहीं बल्कि उसके चरित्र से आँकी जाती है। - स्वामी विवेकानन्द
•    अभय-दान सबसे बडा दान है। — स्वामी विवेकानन्द


•    कोई व्यक्ति कितना ही महान क्यों न हो, आंखे मूंदकर उसके पीछे न चलिए। यदि ईश्वर की ऐसी ही मंशा होती तो वह हर प्राणी को आंख, नाक, कान, मुंह, मस्तिष्क आदि क्यों देता? - स्वामी विवेकानन्द


•    मौन, क्रोध की सर्वोत्तम चिकित्सा है। — स्वामी विवेकानन्द


•    महान कार्य महान त्याग से ही सम्पन्न होते हैं। — स्वामी विवेकानन्द
•    धर्म वह संकल्पना है जो एक सामान्य पशुवत मानव को प्रथम इंसान और फिर भगवान बनाने का सामर्थय रखती है। - स्वामी विवेकांनंद


•    इच्छा रूपी समुद्र सदा अतृप्त रहता है उसकी मांगे ज्यों-ज्यों पूरी की जाती हैं, त्यों-त्यों और गर्जन करता है। - स्वामी विवेकानन्द


•    आदर्श को पकड़ने के लिए सहस्त्र बार, आगे बढ़ों और यदि फिर भी असफल, हो जाओ तो एकबार नया प्रयास, अवश्य करो। - स्वामी विवेकानन्द


•    लक्ष्य को ही अपना जीवन कार्य समझो हर, समय उसका चिंतन करो उसी का स्वप्न, देखो और उसी के सहारे जीवित रहो। - स्वामी विवेकानन्द


•    जितनी हम दूसरों की भलाई करते हैं, उतना ही हमारा ह़दय शुद्ध होता है और उसमें ईश्वर निवास करता है। -

स्वामी विवेकानन्द
 •    धन से नहीं, संतान से भी नहीं अमृत स्थिति की प्राप्ति केवल त्याग से ही होती है। - स्वामी विवेकानन्द

•    इस संसार में जो अपने आप पर, भरोसा नहीं करता वह नास्तिक है। - स्वामी विवेकानन्द


•    आप ईश्वर में तब तक विश्वास नहीं, कर पाएंगे जब तक आप अपने आप में विश्वास नहीं करते। - स्वामी विवेकानन्द
•    हमारे व्यक्तित्व की उत्पत्ति हमारे विचारों में है, इसलिए ध्यान रखें कि आप क्या विचारते हैं, शब्द गौण हैं, विचार मुख्य हैं और उनका, असर दूर तक होता है। - स्वामी विवेकानन्द


•    जिसने अकेले रहकर अकेलेपन को जीता उसने सब कुछ जीता। -
स्वामी विवेकानन्द
 •    श्रद्धा का अर्थ अंधविश्वास नहीं है। किसी ग्रंथ में कुछ लिखा हुआ या किसी व्यक्ति का कुछ कहा हुआ अपने अनुभव बिना सच मानना श्रद्धा नहीं है। - स्वामी विवेकानन्द

•    जब हर मनुष्य अपने आप पर व एक - दूसरे पर विश्वास करने लगेगा, आस्थावान बन जाएगा तो यह धरती ही स्वर्ग बन जाएगी। - स्वामी विवेकानन्द


•    पीछे मत देखो आगे देखो, अनंत उर्जा, अनंत उत्साह, अनंत साहस और अनंत धैर्य तभी महान कार्य, किये जा सकते हैं। - विवेकानन्द


•    अपने सामने एक ही साध्य रखना चाहिए, जब तक वह सिद्ध न हो तब तक उसी की, धुन में मगन रहो, तभी सफलता मिलती है। - स्वामी विवेकानन्द


•    आपकी सफलता के लिएँ कईं लोग ज़िम्मेदार होंगे मगर निष्फलता के लिएँ सिर्फ आप ही ज़िम्मेदार है। - स्वामी विवेकानंद


•    उन लोगों के पास न बैठो और उन लोगों को अपने पास न बिठाओ जिनकी बातों से तुम्हारे चित्त को उद्विग्नता और अशान्ति होती है – स्वामी विवेकानन्द, 


•    हर अच्छे, श्रेष्ठ और महान कार्य में तीन चरण होते हैं, प्रथम उसका उपहास उड़ाया जाता है, दूसरा चरण उसे समाप्त या नष्ट करने की हद तक विरोध किया जाता है और तीसरा चरण है स्वीकृति और मान्यता, जो इन तीनों चरणों   में बिना विचलित हुये अडिग रहता है वह श्रेष्ठ बन जाता है और उसका कार्य सर्व स्वीकृत होकर अनुकरणीय बन जाता है। – स्वामी विवेकानन्द

•    जागें, उठें और न रुकें जब तक लक्ष्य तक न पहुंच जाएं। - स्वामी विवेकानंद